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माता सप्तमातृका कौन है?

आपके गांव में एक देवी स्थान तो जरुर होगा जहाँ एक नहीं बल्कि सात पिंड स्थापित हैं। आखिर इन पिंडो का रहस्य क्या है। इन पिंडों में कौन सी देवी या देवता रहते है। ये सात पिण्ड माता सप्तमातृका के रूप में पूजे जाते हैं इन देवियों को सप्तमातृका देवियाँ क्यों कहा जाता है , क्या है सप्तमातृकापूजन का महत्व और कैसे इन सातों देवियों में शुम्भ और निशुम्भ का वध करने में माँ दुर्गा की सहायता की थी। वैसे तो सप्तमातृकाओं का जिक्र पहली बार ऋग्वेद में ही आता है और इन्हें सोमरस तैयार करने वाली देवियों के रुप में पूजा जाता है लेकिन देवी महात्म्य , अग्नि पुराण , महाभारत आदि ग्रंथों में सप्तमातृकाओं को तीन प्रकार से दिखाया गया है एक रुप में वो कार्तिकेय की माता के रुप में जानी जाती हैं और दूसरे वो चंडिका देवी की सहयोगी के रुप में दिखाई गई हैं तीसरे वो अंधकासुर राक्षस को मारने के लिए शिव की सहयोगी के रुप में दिखाई गई हैं। आज भी हर एक गांव में देवी स्थान नामक एक मंदिर होता है जहां पिंड के रुप में सात देवियां विराजमान रहती हैं इन्हें गांव की देवी भी कहा जाता है। सप्तमातृकाओं की चर्चा जैन धर्मों और बौद्ध धर्...

हनुमान जी को लाल सिंदूर चढ़ाने का महत्व

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  भारत में लाखों मन्दिर हैं जिनमें बजरंग बली अपने अनेक स्वरूपों के साथ विराजमान हैं। बाला जी, पंचमुखी हनुमान, बजरंगबली, पवनपुत्र हनुमान, बड़े हनुमान आदि इस स्वरूपों में स्थापित सभी मूर्तियों में अधिकरत हनुमान जी को लाल सिंदूर चढ़ाया जाता है और हजारों लाखों की तादात में भक्तगण हनुमान जी की मूर्ति में लाल सिंदूर चढ़ाते हैं। महावीर हनुमान जी श्रीराम के जितने बड़े भक्त थे उतने ही बड़े भक्त वो माता सीता के भी थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार माँ सीता को उन्होंने अपनी मांग में सिंदूर लगाते देखा ।  उन्होंने माँ सीता से इस सिंदूर लगाने की वजह पूछी तो माँ सीता ने उन्हें बताया कि ये सिंदूर उनके सुहाग का प्रतीक है । तो हनुमान जी ने सोचा कि इस सिंदूर को लगाने से श्रीराम के जीवन की रक्षा होती है और प्रभु श्रीराम को स्वास्थ्य और लंबी आयु प्राप्त होती है। श्रीराम भक्त हनुमान जी मन में ये विचार किया कि अगर माँ सीता इतने थोड़े से सिंदूर को माँग में भर कर प्रभु श्रीराम की आयु को बढ़ा सकती है...