माता सप्तमातृका कौन है?

आपके गांव में एक देवी स्थान तो जरुर होगा जहाँ एक नहीं बल्कि सात पिंड स्थापित हैं। आखिर इन पिंडो का रहस्य क्या है। इन पिंडों में कौन सी देवी या देवता रहते है। ये सात पिण्ड माता सप्तमातृका के रूप में पूजे जाते हैं इन देवियों को सप्तमातृका देवियाँ क्यों कहा जाता है,क्या है सप्तमातृकापूजन का महत्व और कैसे इन सातों देवियों में शुम्भ और निशुम्भ का वध करने में माँ दुर्गा की सहायता की थी।

वैसे तो सप्तमातृकाओं का जिक्र पहली बार ऋग्वेद में ही आता है और इन्हें सोमरस तैयार करने वाली देवियों के रुप में पूजा जाता है लेकिन देवी महात्म्य, अग्नि पुराण, महाभारत आदि ग्रंथों में सप्तमातृकाओं को तीन प्रकार से दिखाया गया है एक रुप में वो कार्तिकेय की माता के रुप में जानी जाती हैं और दूसरे वो चंडिका देवी की सहयोगी के रुप में दिखाई गई हैं तीसरे वो अंधकासुर राक्षस को मारने के लिए शिव की सहयोगी के रुप में दिखाई गई हैं।

आज भी हर एक गांव में देवी स्थान नामक एक मंदिर होता है जहां पिंड के रुप में सात देवियां विराजमान रहती हैं इन्हें गांव की देवी भी कहा जाता है। सप्तमातृकाओं की चर्चा जैन धर्मों और बौद्ध धर्मों में भी आती है लेकिन इन माताओं की विशेष पूजा सनातन धर्म में ही की जाती है कहीं-कहीं सप्तमातृका देवियों के साथ एक आठवीं देवी भी दिखती हैं इन्हें योगेश्वरी देवी कहा जाता है जो भगवान शिव के मुख से उत्पन्न हुई हैं

सप्तमातृकाओँ के अतिरिक्त ये 90 माताएँ कार्तिकेय की है जो अजेय हैं और स्कन्द कार्तिकेय की हजारों माताएं हैं महाभारत में कई जगह बताया गया है कि सप्तमातृकाओं की पूजा उस समय हर घर में होती थी और उस वक्त सप्तमातृकाएं सबसे लोकप्रिय देवियों के रुप मे पूजी जाती थीं सामान्य और विशेष पूजा के दिनों में सप्तमातृकाओं की पूजा दिक्पालों और नवग्रहों की पूजा के साथ करने का नियम है इनकी पूजा विशेष शक्ति प्राप्त करने के लिए की जाती है माता सप्तमातृका का महत्व ये है कि राजाओं के द्वारा इनकी पूजा युद्ध के पहले करने की परंपरा रही है।

सप्तमातृका सृष्टि की शुरुआत से संहार तक पूजी जाती हैं और धर्म की स्थापना के लिए दुष्टों के संहार में सहायता भी प्रदान करती हैं।

Comments

Popular posts from this blog

हनुमान जी को लाल सिंदूर चढ़ाने का महत्व