हनुमान जी को लाल सिंदूर चढ़ाने का महत्व
भारत में लाखों मन्दिर हैं जिनमें बजरंग बली अपने अनेक स्वरूपों के साथ विराजमान हैं। बाला जी, पंचमुखी हनुमान, बजरंगबली, पवनपुत्र हनुमान, बड़े हनुमान आदि इस स्वरूपों में स्थापित सभी मूर्तियों में अधिकरत हनुमान जी को लाल सिंदूर चढ़ाया जाता है और हजारों लाखों की तादात में भक्तगण हनुमान जी की मूर्ति में लाल सिंदूर चढ़ाते हैं।
महावीर हनुमान जी श्रीराम के जितने बड़े भक्त थे उतने ही बड़े भक्त वो माता सीता के भी थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार माँ सीता को उन्होंने अपनी मांग में सिंदूर लगाते देखा। उन्होंने माँ सीता से इस सिंदूर लगाने की वजह पूछी तो माँ सीता ने उन्हें बताया कि ये सिंदूर उनके सुहाग का प्रतीक है। तो हनुमान जी ने सोचा कि इस सिंदूर को लगाने से श्रीराम के जीवन की रक्षा होती है और प्रभु श्रीराम को स्वास्थ्य और लंबी आयु प्राप्त होती है। श्रीराम भक्त हनुमान जी मन में ये विचार किया कि अगर माँ सीता इतने थोड़े से सिंदूर को माँग में भर कर प्रभु श्रीराम की आयु को बढ़ा सकती हैं तो अगर वो अपने पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगा लेंगे तो श्रीराम तो अजर अमर हो जाएंगे। तब से भोलेनाथ के अवतार बजरंग बली ने अपने पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगा लिया। और तभी से हनुमान जी को लाल सिंदूर लगाया जाता
है।
इस प्रथा में कई प्रकार के कर्मकांडीय नियम भी आ गए और कुछ परंपराओं के अनुसार हनुमान जी को लाल सिंदूर चढ़ाने का महत्व और उन्हें सिंदूर समर्पित करने में बड़ा अंतर है। कुछ परंपराओं
के अनुसार हनुमान जी को लाल रंग का सिंदूर एक पान के पत्ते पर रख कर चढ़ाना चाहिए।
हनुमान जी को लाल
सिंदूर चढ़ाने का महत्व ये है
कि आपके वैवाहिक जीवन में सुख और शांति बनी रहेगी और पति तथा पत्नी को लंबी आयु प्राप्त
होती है। अगर आपका विवाह नहीं हो रहा है तो भी आप लाल रंग के सिंदूर को हनुमान जी मूर्ति
के सामने चढ़ा सकतें हैं जिससे हनुमान जी के आशिर्वाद स्वरूप आपके विवाह का योग भी
जल्द बन जाता है।
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